मेरे पापा



न ओ हो तो रोती हैं जिदे, ख्वाहिशों का ढेर होता हैं,
पिता हैं तो हमेशा बच्चो का दिल शेर होता हैं।


हमारे जीवन में जितने भी लोग है उनका हमारे प्रति अलग -अलग महत्व है| हमारे प्रिय माता और पिता का भी हमारे जीवन में बहुत अलग- अलग रोल है।
पिता हमारे जीवन के वो शख्श है जो हमें हमेशा से अपने कंधो पर बिठाते आये है ताकी जो खुशियाँ ओ नहीं देख पाए वो खुशियाँ हम जरूर देखे। 
जून के तीसरे रविवार को हर साल हम  फादर्स डे के रूप में मनाते हैं।
आइये ईस" फादर्स डे "पिता की एक खोई हुई झलक से रूबरू होते है। 

भलय ही हम उनको संसार की सारी खुशियाँ नहीं दे पाए लेकिन ज़िन्दगी भर उनके चेहरे पर ओ खुशी तो ला ही सकते है जो हमारी परवाह ओर परवरिश करते -करते उनके चेहरे से कही खो सी गई है।
आज भी याद आते हैं बचपन के वो दिन, जब उंगली मेरी पकड़ कर पापा चलना सिखाया करते थे ओर आज वही उंगलियां mobile से हटती नहीं।
बहुत अरसा हो गया है पापा से घुल मिलकर बात करे हुए सही कहा न हमारे पास तो mobile से नज़र हटाने का समय भी नहीं है। 


जिन्दगी में इस तरह चलना सिखाया कि जिन्दगी की हर कसौटी पर आपको अपने करीब पाया ।
आज भी कभी अपने आप को निचे गिरता हुआ पाता हू तो मुझे मेरे पापा ही याद आते है काश मैं कभी बड़ा ही नहीं होता तो कितना अच्छा होता कम से कम पापा के कंधे पर बैठकर पूरी दुनिया तो देखता,  पापा के साथ सो कर नई दुनिया  के अनमोल सपने तो देखता, उनके हाथ का निवाला खा कर पूरा पेट तो भर जाता, उनकी ऊँगली पकड़ कर ठोकर खाने से तो बचता काश मैं कभी बड़ा ही न हो पाता।

# दुनिया पैसों से चलती है लेकिन मेरे लिए कोई पैसे कमाए जा रहा था, वो थे मेरे पापा।

न जाने क्यों पापा के होते हर महंगा खिलौना
सस्ता सा लगने लगता, पापा के होते न जाने क्यू हर ख्वाहिश पूरी हो जाया करती, न जाने क्यू पापा के होते मैं कभी भी भूखा नहीं सोया आज समझ मे आया साहेब ये जो दुनिया है, ये पैसे से चलती है लेकिन मेरे लिए कोई  पैसे कमाए जा रहा था, ओ थेे मेरे पापा।
किसी ने सही कहा है पापा उस वृक्ष की तरह होते है जिन्हे  हम जीवन भर अपनी समस्याओ से परिचित करवाया करते है ओर ओ हर संभव हमारी इच्छाओ पर खरा उतरते   है और  अंत मैं उन्ही के पास चैन  पाते है। 
न जाने क्यू आज संयुक्त परिवारों के बिखण्डन से बुजुर्ग माँ-बाप की समस्याएं कहीं ज्यादा विकराल हो गयी हैं।
'बागवान' जैसी फिल्में हम देख ही चुके हैं और यह समाज की सच्चाई सी बन गयी है, जहाँ बच्चे बस अपने माँ-बाप की संपत्ति से मतलब रखते हैं, लेकिन उनके प्रति अपनी जिम्मेदारियों को अनदेखा कर देते हैं। 
एक समय था जब हम पापा के बिना खाना तक नहीं खाते थे पर आज न जाने क्या हो गया है पापा हमारे आगे पीछे दौड़ते रहते है पर हम उनकी एक न सुनते।
जाहिर है, संस्कार कहीं न कहीं बिगड़े हैं और इसे सुधारने का प्रयत्न करना ही 'फादर्स डे' की सार्थकता कही जाएगी।

पिता के प्यार को इस article मैं लिखना लगभग नामुम्कीम सा है पर मेने आपको उस पिता की एक झलक दिखलाई है जो लगभग सी कही खो गई है।
ईस  Father's Day   आप अपनी भावनाओं की कम से कम लिख कर तो जरूर प्रकट कर ही सकते है तो अपने पापा को सभी आवश्यकताओ की पूर्ति के लिए एक "थोटा था ठंकु   जलूल बोलना "
So
Wish you a very happy
                               Father's Day


Article by -Shobhit sawale

 मेरी तरफ से भी मेरे पापा को मुझे  तमाम खुशियाँ देने के लिए एक छोटा सा धन्यवाद।